आज के डिजिटल दौर में ChatGPT और Gemini जैसे टूल्स हमारे सबसे करीबी ‘जीनियस’ दोस्त बन गए हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि AI से किसी टॉपिक का जवाब पढ़ते वक्त सब कुछ ‘क्रिस्टल क्लियर’ लगता है, पर परीक्षा हॉल में बैठते ही दिमाग ‘ब्लैंक’ हो जाता है? इसे मनोवैज्ञानिक ‘Illusion of Competence‘ (सक्षमता का भ्रम) कहते हैं। जब हम स्क्रीन पर एक स्ट्रक्चर्ड जवाब देखते हैं, तो हमारे दिमाग को लगता है कि उसे सब आता है, लेकिन असल में वह सिर्फ जानकारी को ‘पहचान’ (recognize) रहा होता है, उसे ‘सीख’ (learn) नहीं रहा होता।

आशीष कुमार एक एजुकेशन-टेक्नोलॉजी रिसर्चर और राइटर हैं। 15 साल के टीचिंग बैकग्राउंड के साथ, छात्रों और शिक्षकों को यह सिखाते हैं कि AI tools का सही उपयोग करके पढ़ाई को आसान और प्रभावी कैसे बनाया जाए। वे FutureReadyStars.com के संस्थापक भी हैं, जहाँ वे एजुकेशन में AI के सुरक्षित और एथिकल इस्तेमाल पर रिसर्च-आधारित आर्टिकल्स लिखते हैं।