[Part 1] में मैंने दिखाया था कि AI को सिर्फ एक ऑटोमैटिक पेपर जनरेटर मान लेना कितनी बड़ी चूक है, और उसकी जगह उसे एक “असेसमेंट असिस्टेंट” की तरह कैसे इस्तेमाल करना चाहिए। अब जब कॉन्टेक्स्ट और ब्लूप्रिंट का तरीका साफ हो चुका है, तो असली सवाल यह आता है कि स्क्रीन के सामने बैठते ही कौन-सा टूल खोलें, और उसमें ठीक-ठीक क्या लिखें कि सीधा बोर्ड-लेवल का पेपर निकल आए। यही व्यावहारिक हिस्सा आज देखते हैं — कौन-सा टूल किस काम का, सीधे कॉपी-पेस्ट होने वाले प्रॉम्प्ट्स, और प्रिंट भेजने से पहले की चेकलिस्ट।
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1. कौन सा AI टूल चुनें? (ChatGPT vs Gemini vs Claude vs Diffit)
हर टूल की अपनी ताकत और सीमाएं हैं। अपने अनुभव और भारतीय शिक्षकों के फीडबैक के आधार पर यहाँ एक सीधा कम्पेरिज़न दिया जा रहा है:
- ChatGPT: स्ट्रक्चर्ड पेपर्स, मार्किंग स्कीम और ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिए यह सबसे तेज़ और भरोसेमंद है। अगर आप प्रॉम्प्ट में सटीक निर्देश देते हैं, तो यह गणितीय सूत्रों और साइंस के न्यूमेरिकल्स के लिए बेहतरीन ड्राफ्ट तैयार करता है।
- Google Gemini: यह तब सबसे ज्यादा काम आता है जब आपको बिल्कुल लेटेस्ट NCERT सिलेबस, हालिया करंट अफेयर्स या किसी नई सरकारी योजना से जुड़े केस-स्टडी सवाल तैयार करने हों। गूगल सर्च से सीधे जुड़े होने के कारण इसका डेटा हमेशा अप-टू-डेट रहता है।
- Claude (Anthropic): अगर आप सोशल साइंस, हिंदी या लिटरेचर का पेपर बना रहे हैं, तो Claude की भाषा शैली सबसे ज्यादा प्राकृतिक और मानवीय होती है। यह कठिन और भारी-भरकम शब्दों के बजाय सहज, क्लासरूम-फ्रेंडली हिंदी में सवाल तैयार करता है।
- Diffit for Teachers: यह टूल खास तौर पर पैसेज-बेस्ड सवालों और वर्कशीट्स के लिए बना है। अगर आपके पास किसी चैप्टर की कोई खास PDF या टेक्स्ट है, तो उसे यहाँ पेस्ट करके आप सेकंडों में फिल-इन-द-ब्लैंक्स, वोकैबुलरी और शॉर्ट क्वेश्चन वाली रेडीमेड वर्कशीट निकाल सकते हैं।

2. रेडी-टू-यूज़ मास्टर प्रॉम्प्ट्स (सीधे कॉपी-पेस्ट करें)
AI से बेहतरीन आउटपुट निकालने का एकमात्र राज़ है—’रोल + टास्क + शर्तें’ का सही कॉम्बिनेशन। नीचे दिए गए प्रॉम्प्ट्स को आप सीधे कॉपी करके अपनी ज़रूरत के अनुसार ब्रैकेट [...] वाली जानकारी बदलकर इस्तेमाल कर सकते हैं।
कमांड:
“तुम एक अनुभवी [CBSE/UP Board/ICSE] के [Subject] शिक्षक और assessment designer हो। कक्षा [10] के अध्याय ‘[Chapter Name]’ पर 25 अंकों का एक Unit Test Paper तैयार करो। परीक्षा की समय सीमा 45 मिनट है।पेपर का प्रारूप इस प्रकार हो:
- Section A: 5 MCQs – 1 अंक प्रत्येक = 5 अंक
- Section B: 3 अति लघु उत्तरीय प्रश्न – 2 अंक प्रत्येक = 6 अंक
- Section C: 2 लघु उत्तरीय प्रश्न – 3 अंक प्रत्येक = 6 अंक
- Section D: 1 Case-Study/Competency-Based Question – 4 अंक
- Section E: 1 Application-Based Question – 4 अंक
कुल = 25 अंक
निर्देश:
- सभी प्रश्न दिए गए syllabus और provided study material के भीतर हों।
- Questions में केवल recall पर निर्भरता न हो; जहां उपयुक्त हो, understanding, application और reasoning को भी assess करें।
- Difficulty Level लगभग 30% आसान, 50% मध्यम और 20% कठिन रखें।
- हर प्रश्न का Answer Key और आवश्यक होने पर step-wise Marking Scheme अंत में दें।
- कोई factual uncertainty हो तो उसे छिपाएं नहीं; उसे flag करें ताकि teacher उसे verify कर सके

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प्रॉम्प्ट 2: Competency-Based और Case-Study Questions बनाने के लिए
कमांड: “कक्षा [9/10] के [Science/Social Science/Maths] के टॉपिक ‘[Topic Name]’ पर एक केस-स्टडी आधारित प्रश्न तैयार करो।
शर्तें:
- पहले लगभग 80 से 100 शब्दों का एक ऐसा वास्तविक जीवन का परिदृश्य (Real-life context/Scenario) लिखो जो बच्चे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में देखते हैं।
- इस परिदृश्य के नीचे 3 उप-प्रश्न (Sub-questions) बनाओ (1+1+2 = 4 अंक)।
- उप-प्रश्नों के उत्तर सीधे पैराग्राफ में लिखी लाइनों की नकल न हों, बल्कि विद्यार्थी को दिए गए डेटा और अपने कॉन्सेप्ट का विश्लेषण करके उत्तर निकालना पड़े।”
प्रॉम्प्ट 3: बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) में ‘अच्छे ऑप्शंस’ बनवाने के लिए
अक्सर AI बहुत आसान या बेतुके गलत ऑप्शंस (Distractors) बना देता है, जिससे बच्चे तुक्का मारकर सही उत्तर पहचान लेते हैं। इसके लिए यह प्रॉम्प्ट इस्तेमाल करें:
कमांड: “कक्षा [10] के अध्याय ‘[Chapter Name]’ से 5 उच्च-स्तरीय बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) बनाओ।
महत्वपूर्ण शर्त: गलत विकल्प (Distractors) ऐसे होने चाहिए जो उन सामान्य गलतियों (Common Misconceptions) पर आधारित हों जो छात्र आमतौर पर इस विषय को हल करते समय करते हैं। ऑप्शंस बहुत आसान या स्पष्ट रूप से गलत नहीं दिखने चाहिए।”
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3. यूपी बोर्ड और हिंदी मीडियम शिक्षकों के लिए ‘ट्रांसलेशन हैक’
हिंदी मीडियम के शिक्षकों के साथ सबसे बड़ी परेशानी यह आती है कि AI सीधे हिंदी में सवाल बनाते समय ऐसी भारी और अप्रचलित हिंदी लिख देता है जो स्कूल के बच्चों की समझ से बाहर होती है (जैसे ‘Velocity’ को ‘वेग’ लिखने के बजाय बहुत जटिल वाक्य बना देना)।

इसका सबसे आसान और जादुई समाधान:
- पहले ऊपर दिए गए प्रॉम्प्ट्स से पूरा पेपर अंग्रेजी में जनरेट करवा लें। जब अंग्रेजी का स्ट्रक्चर और सवाल बिल्कुल सही लगें, तब उसी चैट में यह दूसरा कमांड दें:
हिंदी ट्रांसलेशन प्रॉम्प्ट: “अब इस पूरे प्रश्नपत्र और Answer Key को सरल, स्पष्ट और बोर्ड-स्तरीय हिंदी में अनुवादित करो।
- भाषा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) के कक्षा [10] के छात्रों के अनुकूल होनी चाहिए।
- कठिन, संस्कृत-निष्ठ या अप्राकृतिक शब्दों के स्थान पर सामान्य बोलचाल और मानक पाठ्यपुस्तक वाली हिंदी का प्रयोग करें।
- मुख्य वैज्ञानिक या तकनीकी शब्दों को कोष्ठक (Brackets) में अंग्रेजी में भी लिखें, जैसे: प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)।”
इस तरीके से हिंदी पेपर की भाषा को काफी सहज और consistent बनाया जा सकता है। लेकिन final paper को textbook और teacher की subject knowledge से जरूर verify करें।
4. AI से ‘मार्किंग स्कीम’ और ‘मॉडल आंसर्स’ तैयार करवाना
सिर्फ पेपर बनाना ही नहीं, कॉपियां चेक करते समय निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मार्किंग स्कीम बहुत ज़रूरी होती है।
पेपर बनने के बाद AI से कहें:
“इस प्रश्नपत्र के सेक्शन C और D के प्रश्नों के लिए एक ‘स्टेप-वाइज़ मार्किंग गाइड’ (Step-wise Marking Guide) बनाओ। मुझे बताओ कि किस स्टेप या मुख्य बिंदु (Key-point) को लिखने पर छात्र को कितने अंक (0.5, 1 या 1.5) मिलने चाहिए, ताकि कॉपी जांचते समय मूल्यांकन सटीक रहे।”
यह स्टेप-मार्किंग गाइड आपको और आपके साथी शिक्षकों को कॉपियों का निष्पक्ष और तेज़ मूल्यांकन करने में बहुत मदद करेगी।
प्रिंट भेजने से पहले की 10-पॉइंट चेकलिस्ट
AI का बनाया पेपर Word में पेस्ट करने के बाद, प्रिंट पर भेजने से पहले मैं इन दस बातों पर एक बार ज़रूर नज़र डालता हूं:
- सिलेबस सीमा — कोई सवाल ऐसा तो नहीं आ गया जो इस टर्म में पढ़ाया ही नहीं गया
- अंकों का योग — सभी सेक्शन मिलाकर कुल मार्क्स सही बैठ रहे हैं या नहीं
- समय की उपयुक्तता — दिए गए समय में एक औसत छात्र पूरा पेपर हल कर पाएगा या नहीं
- न्यूमेरिकल्स — AI के दिए फॉर्मूले और कैलकुलेशन खुद हल करके जांचना
- MCQ में एक ही सही उत्तर — किसी विकल्प में दो सही जवाब या कोई अस्पष्टता तो नहीं
- भाषा की सरलता — सवाल इतना स्पष्ट हो कि बच्चे को दोबारा पूछने की ज़रूरत न पड़े
- डायग्राम और स्पेस — जहां चित्र चाहिए वहां पेपर में पर्याप्त जगह है या नहीं
- इंटरनल चॉइस — ‘अथवा’ वाले दोनों सवालों का कठिनाई स्तर बराबर है या नहीं
- सामान्य निर्देश — नेगेटिव मार्किंग, सेक्शन-वाइज़ निर्देश और कैलकुलेटर की अनुमति साफ लिखी है या नहीं
- स्कूल का हेडर — स्कूल का नाम, परीक्षा का नाम, विषय, कक्षा और तारीख सही हैं या नहीं
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अंतिम विचार

तकनीक का उद्देश्य शिक्षक की जगह लेना कभी नहीं हो सकता। AI का असली मूल्य यह है कि वह आपके उन 2 से 3 घंटों को बचा लेता है जो पेपर टाइप करने, फॉर्मेटिंग करने और नए सवाल सोचने में खर्च होते थे।
जब आप उस बचे हुए समय का उपयोग कमज़ोर बच्चों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन देने और अपने क्लासरूम को जीवंत बनाने में करते हैं, तब जाकर सही मायने में तकनीक और शिक्षा का संगम होता है। इस आने वाली परीक्षा में इन टूल्स और प्रॉम्प्ट्स को आज़माकर देखें—आपकी अध्यापन यात्रा पहले से कहीं ज्यादा सुगम और प्रभावी बनेगी।

आशीष कुमार एक एजुकेशन-टेक्नोलॉजी रिसर्चर और राइटर हैं। 15 साल के टीचिंग बैकग्राउंड के साथ, छात्रों और शिक्षकों को यह सिखाते हैं कि AI tools का सही उपयोग करके पढ़ाई को आसान और प्रभावी कैसे बनाया जाए। वे FutureReadyStars.com के संस्थापक भी हैं, जहाँ वे एजुकेशन में AI के सुरक्षित और एथिकल इस्तेमाल पर रिसर्च-आधारित आर्टिकल्स लिखते हैं।