कुछ साल पहले तक ज़्यादातर टीचर्स के लिए लेसन प्लान बनाना दिन का सबसे समय लेने वाला काम माना जाता था। क्लास खत्म होने के बाद या सुबह स्कूल जाने से पहले कॉपी, किताब और सिलेबस लेकर बैठना पड़ता था। कई बार सिर्फ एक पीरियड की तैयारी में ही 40 से 60 मिनट निकल जाते थे।
लेकिन हाल के वर्षों में भारत के कई स्कूलों में AI के इस्तेमाल पर हुई स्टडीज़ और पायलट प्रोजेक्ट्स ने एक दिलचस्प बदलाव दिखाया है। जिन शिक्षकों ने ChatGPT, Google Gemini जैसे AI टूल्स को अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया, उन्होंने पाया कि लेसन प्लान बनाने में लगने वाला समय काफी कम हो गया। सबसे खास बात यह रही कि उनमें से बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की थी जिन्होंने पूरा काम लैपटॉप पर नहीं, बल्कि अपने स्मार्टफोन से किया।
यानी अगर आपके पास सिर्फ एक एंड्रॉयड फोन, इंटरनेट और पांच-दस मिनट का समय है, तो आप भी एक ऐसा लेसन प्लान तैयार कर सकते हैं जिसे सीधे क्लासरूम में इस्तेमाल किया जा सके।
ध्यान रहे, AI का उद्देश्य आपकी जगह पढ़ाना नहीं है। यह सिर्फ आपकी तैयारी को आसान बनाता है। क्लास में बच्चों को समझाने का तरीका, उदाहरण और माहौल आज भी एक अच्छे शिक्षक की सबसे बड़ी ताकत है।
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शुरू करने से पहले बस इतनी तैयारी कर लें
शुरू करने से पहले आपको किसी महंगे सॉफ्टवेयर या लैपटॉप की जरूरत नहीं है। अपने मोबाइल में ChatGPT या Google Gemini का ऐप इंस्टॉल कर लीजिए। दोनों का मुफ्त संस्करण भी सामान्य लेसन प्लान तैयार करने के लिए काफी है।
इसके बाद अपने पास सिर्फ चार बातें तैयार रखें—

- कक्षा
- विषय
- टॉपिक
- पीरियड का समय
बस इतनी जानकारी AI को एक अच्छा लेसन प्लान तैयार करने के लिए पर्याप्त होती है।
सिर्फ 10 मिनट में पूरा लेसन प्लान – पांच आसान स्टेप
पूरा तरीका एक वास्तविक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आज आपको कक्षा पाँच में “स्वर और व्यंजन” पढ़ाना है।
पहला स्टेप – जानकारी साफ-साफ दें
AI अनुमान लगाना पसंद नहीं करता। जितनी स्पष्ट जानकारी देंगे, उतना बेहतर परिणाम मिलेगा।अगर आप सिर्फ इतना लिखेंगे कि “स्वर और व्यंजन पर लेसन प्लान बना दो”, तो जवाब सामान्य होगा।
लेकिन अगर आप लिखेंगे—
“कक्षा पाँच, विषय हिंदी, टॉपिक स्वर और व्यंजन, अवधि 35 मिनट। भाषा आसान रखें। एक गतिविधि, अंत में पाँच प्रश्नों की क्विज़ और गृहकार्य भी शामिल करें।”
तो Artificial Intelligent उसी स्तर के बच्चों के अनुसार जवाब तैयार करेगा। यह छोटा-सा बदलाव ही अच्छे और साधारण लेसन प्लान के बीच का अंतर पैदा करता है।
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दूसरा स्टेप – टाइपिंग में समय मत गंवाइए
मोबाइल पर लंबा प्रॉम्प्ट टाइप करना हमेशा आसान नहीं होता। खासकर तब, जब अगली घंटी बजने वाली हो। ऐसे समय में एक आसान तरीका है—Voice Typing I अपने मोबाइल के कीबोर्ड पर बने माइक्रोफोन आइकन पर टैप कीजिए और जैसे आप किसी साथी शिक्षक से बात करते हैं, वैसे ही बोलना शुरू कर दीजिए।
“कक्षा पाँच का हिंदी लेसन प्लान चाहिए। विषय स्वर और व्यंजन है। 35 मिनट का पीरियड है। बच्चों के लिए एक मजेदार गतिविधि और पाँच सवालों की क्विज़ भी जोड़ देना।”
ज्यादातर मामलों में Voice Typing, हाथ से टाइप करने की तुलना में काफी तेज़ और सुविधाजनक साबित होती है।
तीसरा स्टेप – एक अच्छा प्रॉम्प्ट ही आधा काम कर देता है
कई शिक्षक AI से सिर्फ “Lesson Plan बना दो” लिखकर परिणाम की उम्मीद करते हैं। फिर शिकायत करते हैं कि आउटपुट बहुत सामान्य आया। असल फर्क प्रॉम्प्ट में होता है।

अपने मोबाइल में नीचे दिया गया प्रॉम्प्ट सेव करके रखिए। जरूरत पड़ने पर केवल कक्षा, विषय और टॉपिक बदलना होगा।
मैं [8वीं] कक्षा को [CISCE बोर्ड] के अनुसार [प्रकाश संश्लेषण / Photosynthesis] पढ़ाने जा रहा हूँ। मुझे किताबी ज्ञान या 4 पेज का निबंध नहीं चाहिए। मेरे पास सिर्फ 10 मिनट हैं, इसलिए मुझे एक ‘ह्यूमन-टीचर’ वाला बहुत छोटा लेसन प्लान दो जिसमें सिर्फ ये 4 चीज़ें हों: 1. Hook: बच्चों का ध्यान खींचने वाला एक दिलचस्प सवाल। 2. देसी उदाहरण: एक ऐसा उदाहरण जो गांव या शहर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी (जैसे खेती या किचन) से जुड़ा हो। 3. Plan B एक्टिविटी: बिना किसी लैब या सामान के होने वाली 2 मज़ेदार एक्टिविटी, ताकि अगर बच्चे एक से बोर हों, तो मैं दूसरी करवा सकूँ। 4. होमवर्क: एक सोचने वाला होमवर्क जिसमें घर की कोई चीज़ ढूंढनी हो。
ध्यान दीजिए कि इस एक प्रॉम्प्ट में आपने AI को केवल लेसन प्लान बनाने के लिए नहीं कहा, बल्कि यह भी बता दिया कि उसे किस स्तर की भाषा, किस प्रकार की गतिविधि और किस तरह का मूल्यांकन शामिल करना है।
यही वजह है कि परिणाम पहले की तुलना में कहीं अधिक उपयोगी होता है अब देखते हैं कि इसका परिणाम कैसा दिखता है मान लीजिए इन टूल्स ने आपके लिए लेसन प्लान तैयार किया। सबसे पहले वह बच्चों से कोई परिभाषा याद करने के लिए नहीं कहता। वह बातचीत से शुरुआत करता है।
“बच्चों, अगर मैं ‘अनार’, ‘इमली’ और ‘आम’ बोलूँ, तो क्या इन तीनों शब्दों की शुरुआत में कुछ समान दिखाई देता है?”
बच्चे अपने-अपने उत्तर देने लगते हैं। यहीं से विषय में उनकी रुचि बनती है।
इसके बाद Chatgpt and Gemini सुझाव देता है कि स्वर और व्यंजन की परिभाषा सीधे पढ़ाने के बजाय बच्चों से कुछ सामान्य शब्द बुलवाइए और उन्हें बोर्ड पर लिखते जाइए। फिर बच्चों से पूछिए कि किन शब्दों की शुरुआत स्वर से हुई और किनकी व्यंजन से। बिना किसी चार्ट, प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड के भी पूरी कक्षा सक्रिय हो जाती है।
यहीं AI की सबसे बड़ी उपयोगिता दिखाई देती है। वह आपको पढ़ाने का तरीका सुझाता है, लेकिन क्लासरूम की ऊर्जा अब भी आपके अनुभव और प्रस्तुति पर निर्भर रहती है।
चौथा स्टेप – लेसन प्लान को अपनी कक्षा के अनुसार ढालिए
AI ने लेसन प्लान बना दिया, लेकिन अभी उसे बिना देखे क्लास में ले जाना सही नहीं होगा।
हर स्कूल, हर बोर्ड और हर कक्षा अलग होती है। ये टूल्स यह नहीं जानता कि आपकी कक्षा में कौन-सा बच्चा पढ़ाई में थोड़ा पीछे है, कौन जल्दी सीख जाता है या आपकी किताब में कौन-सी शब्दावली इस्तेमाल की गई है।
इसलिए पूरा लेसन प्लान एक बार ध्यान से पढ़िए। अगर कोई शब्द कठिन लगे तो AI से कहिए, “इसे पाँचवीं कक्षा के बच्चों की भाषा के अनुसार और आसान कर दो।”
अगर उदाहरण आपके क्षेत्र से मेल नहीं खाते तो लिखिए, “उदाहरण भारतीय सरकारी स्कूल के बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े हुए दो।”
अगर आप CBSE स्कूल में पढ़ाते हैं तो यह भी लिख सकते हैं, “उदाहरण NCERT की भाषा और स्तर के अनुसार रखो।” सिर्फ दो-तीन छोटे बदलाव आपका लेसन प्लान पूरी तरह आपकी कक्षा के अनुकूल बना देते हैं।
पाँचवाँ स्टेप – हमेशा एक Plan B तैयार रखें
कई बार आपने बहुत अच्छी गतिविधि सोच रखी होती है, लेकिन क्लास में पहुँचते ही पता चलता है कि बच्चे उस दिन उतने सक्रिय नहीं हैं। कभी समय कम बचता है, कभी बिजली चली जाती है, तो कभी जिस सामग्री की ज़रूरत थी, वह उपलब्ध नहीं होती।
ऐसी स्थिति से बचने का सबसे आसान तरीका है कि AI से पहले ही एक वैकल्पिक गतिविधि भी तैयार करवा लें।
बस एक लाइन और जोड़ दीजिए—
“अगर पहली गतिविधि सफल न हो पाए, तो बिना किसी अतिरिक्त सामग्री के दूसरी गतिविधि भी सुझाइए।”
मान लीजिए पहली गतिविधि में बच्चों को शब्द पहचानने थे। AI दूसरी गतिविधि के रूप में यह सुझाव दे सकता है कि शिक्षक कोई भी शब्द बोले और बच्चे तुरंत बताएँ कि उसकी शुरुआत स्वर से होती है या व्यंजन से। पूरी कक्षा इसमें भाग ले सकती है और किसी अतिरिक्त संसाधन की भी आवश्यकता नहीं पड़ती।
यही छोटी-छोटी बातें एक सामान्य लेसन प्लान को वास्तव में उपयोगी बनाती हैं।
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ChatGPT और Gemini में किसे चुनें?
यह सवाल लगभग हर शिक्षक पूछता है।

अगर आपका उद्देश्य आसान हिंदी में जल्दी लेसन प्लान तैयार करना है, तो Google Gemini अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। यह भारतीय भाषाओं में स्वाभाविक उत्तर देने में अक्सर बेहतर अनुभव देता है।
वहीं अगर आपको किसी टॉपिक को अलग-अलग तरीकों से समझाना है, गतिविधियों के कई विकल्प चाहिए या प्रॉम्प्ट में बार-बार बदलाव करके आउटपुट बेहतर बनाना है, तो ChatGPT काफी उपयोगी रहता है।
अच्छी बात यह है कि आपको इनमें से किसी एक तक सीमित रहने की ज़रूरत नहीं है। बहुत-से शिक्षक पहला ड्राफ्ट Gemini से तैयार करते हैं और फिर उसी लेसन प्लान को ChatGPT में देकर कहते हैं—”इसे और रोचक बनाओ, दो नई गतिविधियाँ जोड़ो और पाँच सोचने वाले प्रश्न भी शामिल करो।” कई बार इससे और बेहतर परिणाम मिल जाते हैं।
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AI का इस्तेमाल करते समय तीन बातें हमेशा याद रखें
AI आपकी मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा शिक्षक का होना चाहिए।
पहली बात, कभी भी लेसन प्लान को बिना पढ़े कॉपी-पेस्ट न करें। कभी-कभी AI गलत तथ्य, कठिन भाषा या पाठ्यक्रम से बाहर की जानकारी भी जोड़ सकता है। इसलिए एक बार NCERT या अपनी पाठ्यपुस्तक से मिलान करना हमेशा अच्छी आदत है।
दूसरी बात, बच्चों की निजी जानकारी इन टूल्स में कभी न लिखें। किसी छात्र का नाम, मोबाइल नंबर, रिपोर्ट कार्ड या व्यक्तिगत विवरण साझा करने से बचें। यदि किसी विशेष परिस्थिति पर सलाह चाहिए, तो केवल “Student A” या “एक छात्र” जैसे सामान्य शब्दों का उपयोग करें।
तीसरी बात, AI को अपनी जगह शिक्षक मत बनने दीजिए। बच्चे आपकी मुस्कान, आपके सवाल, आपकी आवाज़ और आपके अनुभव से सीखते हैं। AI सिर्फ तैयारी आसान करता है, पढ़ाता आज भी शिक्षक ही है।
एक छोटा-सा स्मार्ट हैक, जो हर शिक्षक को अपनाना चाहिए अगर, कोई लेसन प्लान आपको बहुत अच्छा लगा है, तो उसे हर बार दोबारा बनाने की ज़रूरत नहीं है।
अपने मोबाइल में उसका स्क्रीनशॉट लेकर एक अलग फ़ोल्डर बना लीजिए, जैसे—”Lesson Plans 2026″।
इसके साथ अपनी डायरी में केवल तीन-चार मुख्य शब्द लिख लें। उदाहरण के लिए—
Hook → गतिविधि → क्विज़ → गृहकार्य
अगली बार वही अध्याय पढ़ाते समय पूरा लेसन प्लान दोबारा तैयार करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। केवल कुछ मिनटों में उसे नए बैच के अनुसार अपडेट किया जा सकता है।
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आखिर में
एक अच्छा लेसन प्लान वह नहीं होता जो चार पन्नों में लिखा गया हो। अच्छा लेसन प्लान वह है जो बच्चों को सीखने के लिए उत्साहित करे और शिक्षक को आत्मविश्वास के साथ पढ़ाने में मदद करे।

अगर Artificial intelligent की मदद से आपकी तैयारी का समय एक घंटे से घटकर दस मिनट भी हो जाता है, तो बचा हुआ समय आप बच्चों के साथ बेहतर संवाद बनाने, कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त ध्यान देने और अपनी शिक्षण शैली को बेहतर बनाने में लगा सकते हैं।
यही वजह है कि आज Artificial intelligent को शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सहयोगी माना जा रहा है। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो एक साधारण स्मार्टफोन भी आपकी रोज़ की तैयारी को पहले से कहीं आसान, तेज़ और प्रभावी बना सकता है।
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आशीष कुमार एक एजुकेशन-टेक्नोलॉजी रिसर्चर और राइटर हैं। 15 साल के टीचिंग बैकग्राउंड के साथ, छात्रों और शिक्षकों को यह सिखाते हैं कि AI tools का सही उपयोग करके पढ़ाई को आसान और प्रभावी कैसे बनाया जाए। वे FutureReadyStars.com के संस्थापक भी हैं, जहाँ वे एजुकेशन में AI के सुरक्षित और एथिकल इस्तेमाल पर रिसर्च-आधारित आर्टिकल्स लिखते हैं।
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